Gazal

Zindagi Sad Shayari-जिंदगी की हक़ीक़त कुछ यूं है मेरे हमदम-In Hindi

0 0
Read Time:3 Minute, 17 Second

zindagi sad shayari / zindagi shayari in hindi / sad life shayari

Zindagi    ki    haqiqat   kuch   yun     hai    mere   humdam
Uthati   hai   khamoshi   ki   awaaz  aur ho jati  hai be-dam

Aisi  nisbat  hai  hamari  aisa  talluq hai hamare darmiyaan
Baaton ka  jo  Shuru  ho   silasila   phir  hota   nhi   khatam

Sabuut  hai  meri  be-khudi  ka  hashar  ye  mera   yaaro.n
Anjaan  manzilo.n  ki   taraf  badhte  hue  mere ye  kadam

Na jane  kitne  he  chup  gaye  jakar  naqaab-e-khaakh me
Nhin hoon hamesha ke liye  main nhi hua koi khash karam

Ek   aas   thi   zindagi   ke   phir  laut  aane ki chal  diya wo
Rishtaa  to tod he  diya ya rab na todta mera  wo  bharam

Baagon me hoti  sham sitaron  ko dekha  bikharte  humne
Ghawra  ke chand  ko dupatte  me  chupa lena uuf sharam

Mizaaz   kuch   aisa   hai   Aayino   ka   jaan -e -Jigar  mere
Toot jaye jo ek dafa nahi savarta  phir  chahe de do kasam

Jamaana ek  pinjra hai  jo dikhai nahin deta  hai yaar mere
Mat  be-naqaab  aao bahar mere maheboob  mere sanam

Wo ab wo kyun na rahe jo hua karte the kabhi Aye Rehaan
Kabhi  jo dekh  kar mushkurate  the  ab hote  hain barham

sad life shayari / zindagi sad shayari

zindagi sad shayari
zindagi sad shayari / zindagi shayari in hindi

जिंदगी की हक़ीक़त कुछ यूं है मेरे हमदम – In Hindi sad life shayari

जिंदगी   की    हक़ीक़त    कुछ    यूं    है   मेरे   हमदम
उठती है  ख़ामोशी  की  आवाज  और  हो जाती है बेदम

ऐसी निस्बत  है  हमारी  ऐसा  ताल्लुक़ है हमारे दर्मियां
बातों का  जो  शुरू हो  सिलसिला  फिर होता नही ख़त्म

सबूत  है   मेरी   बे-खुदी  का हश्र  ये  मेरा   हाल   यारों
अंजान   मंजिलों   की   तरफ़   बढ़ते    मेरे   ये   क़दम

ना जाने कितने  ही  छुप  गए  जाके नक़ाब-ए-खाख में
नहीं हूं हमेशा के  लिए  मैं  नही  हुआ  कोई ख़ास करम

एक आश  थी  जिंदगी के  फिर लौट आने की, चल दिए
रिश्ता तो तोड़ ही दिया या खुदा न तोड़ता वो मेरा भरम

बागों में होती  शाम  सितारों  को  देखा  बिखरते  हमने
घबरा  के  चांद  को आंचल में छुपा  लेना  उफ्फ ये शर्म

मिजाज़  कुछ  ऐसा  है मेरे आईनों  का  जान-ए-जिगर
टूट जाए एक दफा फिर  नहीं संवरता  चाहें दे दो कसम

जमाना एक पिंजरा  है जो  दिखाई नही देता है यार मेरे
मत  बे-नकाब  आओ  बाहर   मेरे  महबूब   मेरे  सनम

वो अब वो क्यूं ना रहे जो हुआ करते थे कभी अए रेहान
कभी जो देख के मुस्कुराते थे अब होते हैं देख के बरहम

Also Read ek tarfa pyaar shayari

किसी सूफ़ी कलाम सी तेरी परछाई
ढलती हुई सी रात ने बात ख़राब कर दी।
जब मेरा मुंसिफ ही मेरा क़ातिल हो।
हमने भी बेशुमार पी है ! नज़रों के प्यालों से।
तेरे हुस्न की तस्वीरों का आखिर …
इंतेजाम सब कर लिए सोने के अब नींद भी आ जाये तो करम होगा।
जिसे बनना ही ना हो आख़िर हमसफ़र किसी का।
क्या सितम है के उन्हें नजरें मिलाना  भी  नही  आता। 
खयालों में तो रोज़ ही मिलते हो आके।

Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published.