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कैसे लिखें शायरी | 5 tips for you in just 10 minutes | you can write.

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कैसे लिखें शायरी

ज्यादा लंबी लाइनें ना लिखें!

कैसे लिखें शायरी ? लिखते वक्त हमेशा ध्यान रखो कि लाइन को ज्यादा लम्बा ना होने दें, कम से कम लफ्ज़ों का इस्तेमाल करना, जैसे बहुत से लिखने वाले लाइन को लंबा किए जाते है अपनी बात खत्म करने के लिए बिना सोचे कि इतनी लंबी होने से वो लोगो को बोर कर सकती है इसके लिए ऐसे लफ़्ज़ों का इस्तेमाल करें जो एक बात को एक शब्द में कहने की ताक़त रखते हों या फिर हम अगर छोटे तरीके से भी लिखेंगे तब भी पढ़ने वाला समझ जाएगा क्या कहना चाहते हैं हम। पढ़ने वाले आगे की लाइन समझ जाते हैं पहली लाइन पढ़ के कि हम क्या कहने वाले है, इसलिए समझाने से अच्छा है लाइन्स को खासियत पे ध्यान दे ज्यादा बेहतर होगा। कैसे लिखें शायरी ?

जैसे
आसमान का कोई नूर
नूर-ए-फलक

दूसरों कि जगह ख़ुद को रख़ के लिखना!

जब हम दूसरों को live situations पे लिखते हैं तो पढ़ने वालों की कमी नहीं होती क्योंकि एक जैसे हालात बहुत से लोगों के होते हैं या उनके साथ वैसा कभी ना कभी हुआ होता है, और तो और जब हम किसी चीज़ को महसूस करके लिखते हैं तो हमें उनके दूसरे तरफ़ के हालात पे भी लिख सकते हैं।

सामाजिक मुद्दों पे लिखना

एक अच्छा लेखक वही है जो हर हाल पे लिख ले हर तरह के मुद्दे पे लिख ले समाज पे, प्यार पे, नफ़रत पे इसलिए जब भी कोई देश में मुद्दा उठा हो उसपे लिखो इस का एक फ़ायदा ये भी है कि आप viral हो सकते हो अगर आपने अच्छा लिखा हो और आपकी समाज़ में अच्छी image बनेगी इज़्ज़त मिलेगी।

तुनात्मक लफ्जों का इस्तेमाल!

जब हम किसी भी चीज़ का किसी से तुलना करते है तो वो उसे बहुत ख़ूबसूरत रूप दे देता है जैसे चांद की तरह, सबनम की बूंद को तरह लिखते वक्त ऐसे लफ्जों का इस्तेमाल तो ज़रूर ही करें जिस से आपकी नज़्म, ग़ज़ल जो भी आप लिख रहे हो उसे ख़ूबसूरती मिले और पढ़ने वाले के चहरे पे मुस्कुराहट आ जाए।

तुकबंदी

तुकबंदी (rhyming) एक ऐसी चीज़ है जिस की बदौलत शायरी ज़िंदा रहती है जिस को वजह से शायर को अलग पहचान मिलती है जिस की वज़ह से पढ़ने वाला खुद को पढ़ने से रोक नहीं पाता है और बिना तुकबंदी के शायरी का कोई भी अस्तित्व नहीं है। तुकबंदी को उर्दू में काफिया कहते है। आइए अब सही से समझते हैं इसे!

काफिया (kaafiya)


काफिये का मतलब होता है (rhyming) same sound वाले word’s वह लफ्ज़ जो एक है तरह की आवाज़ पे खत्म होते हैं उन्हें कहते हैं काफिया जैसे:- नज़र,असर,अगर,मगर,खबर। और काफिया हर लाइन में एक जैसी जगह पे ही लिखा जाता है, अभी आप आगे पढ़ेंगे example के साथ।
ग़ज़ल के सिर्फ पहले शेर में दोनों लाइन में काफिया होते है बाकी सभी लाइन्स में पहली लाइन खाली और दूसरी लाइन में काफिया होता है,

इन सब बातों का ध्यान रखते हुए लिखी गई एक ग़ज़ल नीचे दी गई है जिसे पढ़ के आप अच्छे से समझ सकते हैं। कैसे लिखें शायरी

जिन पत्थरों की सूरत नहीं होती
वो काबिले मूरत नहीं होती

जिस्म होता है बर्बाद इंसान का
बर्बाद कभी सीरत नहीं होती

इश्क़ में इबादत तो होती है मगर
इश्क़ में कोई जरूरत नहीं होती

नकारते हो क्यूं इस तर्क से तुम
क्या वैश्या औेरत नहीं होती

वो बच्चे भी भगवान का रूप हैं
सर पे जिनके छत नहीं होती

बेहयाई लिखते है बेबाक उनकी
फना क्यूं क़त नहीं होती

कभी तो समझो जानो हकीकत
बुरी हर लत नहीं होती

परिंदों को क़ैद करना है शौक़
क्यूं ये अदा ग़लत नहीं होती

कुछ में मिलती है सिर्फ़ उदासी
हर मंजिल ख़ूबसूरत नहीं होती
अंज़ाम की फिक्र करते हैं क्यूं
सोच कर तो मोहब्बत नहीं होती

सौदा होता है जिस्म का रेहान
यहां मोहब्बत फक़्त नहीं होती

वो कहते हैं ना बच्चे भगवान का रूप होते है। कैसे लिखें शायरी
जब उन्ही बच्चों को सड़क पे, ढाबे पर, मज़दूरी करते देखते हैं, तो उनके अंदर भगवान क्यूं नहीं दिखता।

और आपको अगर उर्दू के formats सीखने है आसान लफ्जों में तो आप इस जगह से जाके पढ़ सकते है।

Urdu Formats कैसे लिखें शायरी ?

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