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How to write song | Rashk-e-Qamar जैसे गानें कैसे लिखें?

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How to write song like Rashk-e-Qamar

How to write song | Rashk-e-Qamar जैसे गानें कैसे लिखें?

Hello dosto

मेरा नाम रेहान है, और आज मैं आपको बताने जा रहा हूं कि आसान तरीके से ख़ूबसूरत गाने कैसे लिखें। वैसे हमारी ज़िन्दगी में गाने बहुत ही importance रखते है, शेर-ओ-शायरी की तरह, हम अपने दिल का हाल दूसरो को या तो पढ़ के या तो गा के सुनाते है, अपने दिल की बात रखते हैं, और हम लिखने वालों का ये काम होता है दूसरो के दिल की बात लिखना। तो चलो शुरू करते हैं:-

Rashk-e-Qamar (रश्के कमर)

रश्के कमर song के बारे में ऐसा कौन होगा जो नहीं जानता होगा, हर कोई बाकिफ है रश्के कमर song से ये है ही इतना प्यारा और ख़ूबसूरत song जो सीधे दिल को जा लगता है। मगर क्या आप जानते है कि आप भी रश्के कमर जैसा song लिख सकते हैं वो भी बहुत ही आसानी से (yes you can write Raske-e-kamar song very easily).

तो मैं सबसे पहले बता दूं रश्के कमर कोई गाना नहीं है, रश्के कमर एक ग़ज़ल है । रश्के कमर को सबसे पहले fana buland shehri ने लिखा था, जिसे nusrat fateh ali khan ने composed की थी 1988 में।
मगर जब इसको 4 साल पहले गाया गया तो सब के दिलों पे इसने राज़ किया, फिर क्या हर किसी के ज़ुबान पे यही गाना जिसे बाद में manoj muntashir ने दोबारा से लिखा। अब हम बात करते हैं कि हम कैसे लिख सकते हैं और ग़ज़ल क्या होती है।

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ग़ज़ल?

How to write song | Rashk-e-Qamar जैसे गानें कैसे लिखें?

ग़ज़ल उर्दू शायरी कि एक मशहूर form है। जिसके बहुत से rules होते हैं, जैसे काफिया, रदीफ, मतला, मक्ता तखल्लुस और भी बहुत से को हम नीचे पढ़ेंगे;

मतला (matla)
मक्ता ग़ज़ल का पहला शेर होता है जिस की दोनो लाइन में काफिया और रदीफ़ होता है।

मक्ता(maqta)

गज़ल का सब से आखिरी का शेर, जिसमें शायर का तखल्लुस (pen name) होता है।

काफिया (kaafiya)
काफिये का मतलब होता है (rhyming) same sound वाले word’s वह लफ्ज़ जो एक है तरह की आवाज़ पे खत्म होते हैं उन्हें कहते हैं काफिया जैसे:- नज़र,असर,अगर,मगर,खबर।

रदीफ (radeef)
रदीफ, काफिया के बाद आने वाले लफ्ज़ को रदीफ कहते हैं। जो कि हर लाइन में एक जैसा रहता है।

तखल्लुस (takhallush)
शायर, लेखक का अपना नाम ग़ज़ल में लिखा जाना takhallush होता है

ग़ज़ल के सिर्फ पहले शेर में दोनों लाइन में काफिया होते है बाकी सभी लाइन्स में पहली लाइन खाली और दूसरी लाइन में काफिया होता है, इसे अच्छे से समझने के लिए आगे पढ़े।

अब हम देखते है रश्के कमर (Rashk-e-Qamar) में काफिया, रदीफ, मतला मक्ता और तखल्लुस, जो कि fana buland shehri ने लिखी थी सबसे पहले।

मेरे रश्के कमर तूने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया।
बर्क सी गिर गाई काम ही कर गई आग ऐसी लगाई मज़ा आ गया।

  1. दोनो लाइन्स में काफिया है:- मिलाई , लगाई
  2. रदीफ:- मज़ा आ गया (जो दोनो लाइन्स में एक जैसा है)
  3. ऐसे ही शेर को मतला (matla) कहते हैं

इसका अगला शेर है :- How to write song

नशा सीसे में अंगड़ाई लेने लगा, बज़्म ए रिंदा में सागर खनकने लगे,
मएकदे में बरसने लगी मस्तियां जब घटा गिर के छाई मज़ा आ गया।

  1. ग़ज़ल का अगला शेर जिसकी सिर्फ दूसरी लाइन में काफिया और रदीफ है।
  2. इस लाइन का काफिया:- छाई
  3. रदीफ:- मज़ा आ गया।

जैसा कि मैंने पहले ही बोला था सिर्फ ग़ज़ल के पहले शेर में दोनो लाइन में काफिया होता है बाकी सभी लाइन में सिर्फ दूसरी लाइन में काफिया होता है।

अब जायदा देर ना करते हुए इस ग़ज़ल के आखिरी शेर को देखते हैं जिस में शायर का तखल्लुस (takhallush) होता है और जिस शेर को ग़ज़ल का matle का शेर कहते हैं

अए फना शुक्र है आज बाद-ए-फना उसने रख ली मेरे प्यार कि आबरू,
अपने हाथों से उसने मेरी क़ब्र पे चादर-ए-गुल चढ़ाई मज़ा आ गया|

अब ध्यान दीजिएगा जैसा कि मैंने पहले भी कहा था ये ग़ज़ल fana buland shehri ने लिखी है और उनके नाम से है उनका तखल्लुस “फना” मालूम हो रहा है जो की उन्होंने आखिरी शेर में इस्तेमाल किया।

  1. ग़ज़ल का आखिरी शेर जिसे मक्ता(maqta) कहते हैं जिस में तखल्लुस (pen name) होता है लिखने वाले का
  2. काफिया:-
  3. रदीफ:- मज़ा आ गया
  4. और सिर्फ दूसरी लाइन में काफिया है पहली में नहीं|

Rashk-e-Qamar जैसे गानें कैसे लिखें? How to write song.

आप लोगो को और अच्छे से समझ आए इसलिए मैं अपनी लिखी हुई एक ग़ज़ल दिखता हूं, जो कि खास आप लोगो के लिए लिखी है इसी रदीफ पे मगर काफिया दूसरा रखूंगा जिस से आपको आसानी से समझ आए।

मिली सनम तेरी नज़र से जो मेरी नज़र मज़ा आ गया।
फैली जो तेरे मेरे एक होने की खबर मज़ा आ गया।

हाल कहां था होश में मेरा, ख़्याल था बस तेरा ही तेरा,
कहा तूने चाहूंगी तुझे उम्र भर सुन कर मज़ा आ गया।

“रेहान” इशारों में उनके ही तो है बे-शुमार चाहत भरी,
वो जो क़रीब से देखते हुए गए गुज़र मज़ा आ गया।

~रेहान

इन सबके सिवा एक और सीखने कि ज़रूरत है “बहर” बहर के बिना ग़ज़ल नहीं लिखी जा सकती है बहर का मतलब होता है कि ग़ज़ल किस मीटर में लिखी हुई है क्यूंकि ग़ज़ल गाई जाती है और बहर में लिखने से ये होता है कि कोई लाइन छोटी तो कोई लाइन बड़ी नहीं होती सब एक बराबर होती है और आसानी से गाई जा सकती है

मगर बहर को समझना इतना आसान है है इसलिए हम अभी बिना बहर के लिखने और आपको परेशानी ना आए इसलिए मैं आपको एक तरीका भी बता देता हूं कि कैसे लाइन को छोटा बड़ा होने से रोक सकते हैं, आप लिखते वक्त ध्यान रखे कि अगर अपने पहली लाइन में 9 से 11 लफ्ज़ लिखे हैं तो दूसरी लाइन में भी उतने है लिखे।

मैं उम्मीद करता हूं आप सबको समझ आया होगा और अगर कोई परेशानी हो तो आप नीचे comment box में पूछ सकते हैं और social media पे भी फ़ॉलो कर सकते हैं। Rashk-e-Qamar जैसे गानें कैसे लिखें? How to write song.

शुर्किया!

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किसी सूफ़ी कलाम सी तेरी परछाई
ढलती हुई सी रात ने बात ख़राब कर दी।
जब मेरा मुंसिफ ही मेरा क़ातिल हो।
हमने भी बेशुमार पी है ! नज़रों के प्यालों से।
तेरे हुस्न की तस्वीरों का आखिर …
इंतेजाम सब कर लिए सोने के अब नींद भी आ जाये तो करम होगा।
जिसे बनना ही ना हो आख़िर हमसफ़र किसी का।
क्या सितम है के उन्हें नजरें मिलाना  भी  नही  आता। 
खयालों में तो रोज़ ही मिलते हो आके।

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