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Hindi Kavita | हिंदी कविता | Hindi Kavitayen best romantic sad.

Hindi Kavita | हिंदी कविता | Hindi Kavitayen best romantic sad. Read Shushant Singh Rajput’s life’s poetry.

मैं बीज हूं काशी के तट पे पनपा हुआ
तुम शाम के पूजा की लाली हो

शंखों की मधुर सुर में है बास मेरा
तुम अर्चना की थाली हो

संगम है हमारा और नही भी
मैं गंगा तट में मिलता हुआ जल
तुम मुझ में मिलती ग्वाली हो

सौंदर्य है स्पर्श तेरा, मेरे कण कण में प्रीत जगे
मज़हब के दायरों में भी कैद हम

मैं सुबह का भजन सा
तुम दरगाह की क़व्वाली हो

है बस एक ही गाथा हम दोनो की
मैं भी हूं मौन मुद्रा में तुम भी सब पाके सवाली हो

मैं ग़ज़ल हूं काव्य संग्रह में
तुम कविता बड़ी ही दिल वाली हो

हूं मैं कृष्ण दिल्ली शहर का
तुम राधा ब्रिजकुल वाली हो

imaan Hindi Kavita

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Hindi Kavita | हिंदी कविता | Hindi Kavitayen best romantic sad.

वो कहते है पैसे से ख़रीद लेंगे हम तुम्हारा ईमान
उठाई अगर ज़ुल्म के ख़िलाफ़ आवाज़ तो जला देंगे तुम्हारा मकान

उम्र गुज़र चुकी है चंद दिन बाकी हैं
बालों मे सफ़ेद मिलावट चहेरे पे झुर्रिया काफ़ी हैं

वो लोग और होंगे जिनके लिए पैसा है भगवान
मुंह बंद है दौलत से शायद बहोत मज़बूर है इंसान

ऐसे जकड़ रखा है पैसे की ज़रूरत ने सबको
रात मे भी नीला सा नज़र आता है आसमान

आ गया है वो दौर ऐ रेहान
इंसान की कोई क़ीमत ना रही पैसों की हो गई हैं ज़ुबान

हिंदी कविता | Hindi Kavitayen best romantic sad.

Wo kehte hai paison se kharid lenge tumhara imaan
Uthai agar zulm ke khilaaf awaaz to jala denge tumhara makaan

Umar guzar chuki hai chand din baaki hain
Baalo me safedi chehre pe jhurriyan kaafi hai

Wo log aur honge jinke liye paisa hota hai bhagwan
Muh band hai bhook se itna mazboor hai insaan

Aise jakad rakkha hai bhook ne sabko
Raat ko bhi neela sa nazar aata hai asmaan

Aa gya wo daur aye rehaan
Insaan ki koi kimat nhin paiso ki ho gyi hai zubaan

हिंदी कविता | Hindi Kavitayen best romantic sad.

कुछ बातें बिगड़ी हैँ कुछ बातें मानी है

हमने ज़िंदगी एक और नये ढंग से जानी है

हम खुद ही गवा देते है वो खुशियाँ जो हमें पानी हैँ

दूसरो से लड़ कर हमेशा हमने खुद ही की कमियां पहचानी हैँ

हम भी गिरे थे कभी बात ये जरूर पुरानी है

मैं झूठा सही मगर सच मेरी कहानी है

हमें भी किसी को पाना है हमें भी अपनी कमियां मिटानी है

बहोत से राज़ दफ़न हैँ मुझमें अब नहीं कोई बात छुपानी है

सोचता हूँ ज़िन्दगी का ऐतबार करना छोड़ दूं जब मालूम है एक दिन मौत आनी है

क्या करूं किसी से दिल लगा के जब वो ही नहीं मिलता जिसे हर बात बतानी है

नज़र का टीका लगवाना छोड़ दे तू अए रेहान

जब समझता नहीं कोई तुझे तो क्यूँ दुनिया से नज़र मिलानी है

Sad Hindi Kavita

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Best kavita for village womans

साँझ धरे आँगन में वाजे है पायलिया
तोहरी याद में सजना पल पल तड़पे तोहरी पगलिया

आए सावन बदले मौसम खिल गईं बाग़ों में कलियाँ

मगर मन मेरा है सूना , सुनी हैं मेरी गालियाँ

साँझ धरे आँगन में बाजे है पायलिया

कोन जाने हाल ये वीरान मेरे दिल का
साँसें करती हैं इंतज़ार मेरे ख़्वाबों के कातिल का

यौवन में लगती है आग बारिश आके बुझा जाए
तपती धूप में है घूमें तेरी ये गुमनिया

साँझ धरे आँगन में बाजे है पायलिया

भीगीं पलकें बिछाए बैठे कब तुम आओगे
ले लूँ तेरी सारी बलाएं घर जब तुम आओगे

पिया परदेशी तू का जाने कैसे गुज़रे दिन
पल पल तेरी याद में मरे तेरी ये सजनिया

साँझ धरे आँगन में बाजे है पायलिया

सर्दी की वो सर्द हवा और चुभती रातें
कैसे हम बिन तेरे सजना काटें

हो मिलन जब दो फूलों का खुशबू जब जब महके
लगने लगे सुनी सुनी ये सारी दुनिया

urdu kavita in hindi

ख्वाहिशों की दराज़ो मे कुछ बेनाम से ख़त मिले

वो किसी और का होकर मुझसे मिलने आये तो मुझसे मत मिले

मैं अभी भी उसकी आरज़ू रखता हूँ मगर
किसी दूसरे की है वो अगर तो मुझे ना वो अमानत मिले

इश्क़ तो बहोत करता हूँ एक कतरा भी निगाहों मे उसकी गवारा नहीं
मगर थोड़ा तो सताना बनता है उसको भी मेरी यादो से कभी ना ज़मानत मिले

मिले चाहत मिले इबादत मिले सदाकत मिले सजाबत मिले आहत
बस उसको ना राहत मिले

खुदगर्ज़ नहीं हूँ मैं जो उसके हक़ मे दुआ ना करूं
मगर वो जरा पत्थर दिल, बेरहम, बेदर्द है
फिर भी कहता है खुद को नादान
तौबा किसी को ना ऐसी सराफत मिले

Very Sad Hindi Kavita

हाँ ठीक है ! मैं तुझे याद नहीं करूंगा 
हाँ ठीक है ! मैं कोई फ़रियाद नहीं करूंगा 

हाँ ठीक है ! मैं तुझे याद नहीं करूंगा 
हाँ ठीक है ! मैं कोई फ़रियाद नहीं करूंगा 

मगर मैं ये नहीं कहता जब ज़िक्र होगा तेरा तो तेरी बात नहीं करूंगा 

हाँ ठीक है ! मैं तुझे याद नहीं करूंगा 

हाँ ठीक है ! मैं तेरे इश्क़ मे खुद को बर्बाद नहीं करूंगा 
हाँ ठीक है ! मैं तेरी मुराद नहीं करूंगा 

मगर मैं ये नहीं कहता तुझसे मैं मुलाक़ात नहीं करूंगा
हाँ ठीक है ! मैं तुझे याद नहीं करूंगा 

हाँ ठीक है ! मैं  तेरी निशानियों  से दिल ना-साद नहीं करूंगा 
हाँ ठीक है ! मैं मोहब्बत किसी और से तेरे जाने के बाद नहीं करूंगा

मगर मैं ये नहीं कहता तेरे निगाहों की अपनी निगाहों मे बरसात नहीं करूंगा 

हाँ ठीक है ! मैं तुझे याद नहीं करूंगा 
हाँ ठीक है ! मैं कोई फ़रियाद नहीं करूंगा 

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आज लफ्ज़ कम पड़ गए सोचा तुमसे मुलाक़ात कर लेता हूँ
दिल और लबो के दरमियाँ जो दबी है वो बात कर लेता हूँ

बैसे तो दूर दूर तक नज़र आते है खुशियों के मंज़र
लेकिन जाते जाते उसके निगाहों की अपनी निगाहों मे बरसात कर लेता हूँ

आज लफ्ज़ कम पड़ गए सोचा तुमसे मुलाक़ात कर लेता हूँ

आता देख मुझे अपने दर् के करीब ऐ सनम सिकंन ना डाल माथे पे
मैं अपने साथ इस दिन को रात कर लेता हूँ

आज लफ्ज़ कम पड़ गए सोचा तुमसे मुलाक़ात कर लेता हूँ

चलते चलते गर कभी ठोंकर लगे और दूर तक कोई नज़र ना आये ऐसे आलम मे मैं तुझे अपने साथ कर लेता हूँ

आज लफ्ज़ कम पड़ गए सोचा तुमसे मुलाक़ात कर लेता हूँ

बेशक़ फकीरी मे रहे-गुज़र है मेरी कुछ भी नहीं पास मेरे
फिर भी दिखे कोई फ़कीर तो तेरे नाम की खैरात ओ जकात कर लेता हूँ

आज लफ्ज़ कम पड़ गए सोचा तुमसे मुलाक़ात कर लेता हूँ

तेरे सोखी के ख्याल मे दामन -ए-मेहबूब की आरजू होती है
मैं अपनी इस तमन्ना-ए-बहार को असार-ए-यार मे इरशाद कर लेता हूँ

आज लफ्ज़ कम पड़ गए सोचा तुमसे मुलाक़ात कर लेता हूँ

मैं अपनी तकदीर को मिटा कर तेरे दर् पे झुका देता हूँ जब तुम निकलती है उसपे कदम रख के
मैं खुद ही अपनी ख्वाहिशों की जिहात कर लेता हूँ

आज लफ्ज़ कम पड़ गए सोचा तुमसे मुलाक़ात कर लेता हूँ

जब तुम मुझे अपनी महफ़िल मे बुला के सरे-आम बदनाम करता है
मैं तेरी मासूमियत भारी बातो को याद करके सब बर्दास्त कर लेता हूँ

आज लफ्ज़ कम पड़ गए सोचा तुमसे मुलाक़ात कर लेता हूँ

होते है जो मुझे पे सितम् लिखता हूँ उनकी अर्ज़ीया खुदा को
तेरी नादानीयों के सदके उन सभी को बर्खास्त कर देता हूँ

आज लफ्ज़ कम पड़ गए सोचा तुमसे मुलाक़ात कर लेता हूँ

तेरी मखमली पनाहो मे बिताये थे कुछ रहेनुमा लम्हे तलब-ए-खाश मे उन्हें जीनत-ए-हयात कर लेता हूँ

आज लफ्ज़ कम पड़ गए सोचा तुमसे मुलाक़ात कर लेता हूँ

जब ज़िक्र होता है इश्क़ के मारो की जमात मे सहनाज़-ए-यार का मैं बड़े ही एहतराम से सिफात कर लेता हूं

आज लफ्ज़ कम पड़ गए सोचा तुमसे मुलाक़ात कर लेता हूँ

अये जहां वालो अब क्या बातये राज़-ए-जेहद “रेहान”
अपनी मौत के डर् से अपने ही कातिल से बरात कर लेता हूँ

आज लफ्ज़ कम पड़ गए सोचा तुमसे मुलाक़ात कर लेता हूँ

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